PETA इंडिया https://www.petaindia.com/hi/ <span class="one" style='text-align:center;font-size: 1.28rem;'>ANIMALS ARE NOT OURS</span> <span class="two" style='font-size:1.0rem;text-align:center'>TO EXPERIMENT ON, EAT, WEAR, USE </span><span class="three" style="text-align:center;font-size:1.0rem">FOR ENTERTAINMENT, OR ABUSE IN ANY OTHER WAY.</span> Wed, 21 Jun 2023 06:00:26 +0000 hi-IN hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.2.2 ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के अवसर पर PETA इंडिया ने बिलबोर्ड अभियान के द्वारा लोगों को पशु गोद लेने की अपील की https://www.petaindia.com/hi/blog/new-international-yoga-day-peta-india-billboard-campaign-encourages-animal-adoption-2/ Wed, 21 Jun 2023 05:28:06 +0000 https://www.petaindia.com/blog/new-international-yoga-day-peta-india-billboard-campaign-encourages-animal-adoption-2/ PETA इंडिया चेन्नई, हैदराबाद, जयपुर, कोलकाता और लखनऊ के लोगों को एक स्थानीय आश्रय से एक जानवर को गोद लेने और उनके साथ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए ...

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) के अवसर पर PETA इंडिया ने जयपुर, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता और लखनऊ में विज्ञापन प्रकाशित कर लोगों को अपने योग साथी के रूप में किसी स्थानीय शेल्टर होम से एक कुत्ता या बिल्ली गोद लेने की अपील की है।

यह सभी बिलबोर्ड यहाँ लगवाए गए हैं।

PETA इंडिया इस पर ज़ोर देता है कि जब भी कोई व्यक्ति पशु बिक्री दुकानों से, किसी ब्रीडर से या ऑनलाइन तथाकथित “बढ़िया नस्ल” के कुत्ते या बिल्ली को खरीदता है तो सड़क पर बेघर घूमने वाले किसी एक सामुदायिक पशु को या शेल्टर में रहने वाले किसी पशु को उसका घर मिलने का अवसर समाप्त हो जाता है। बेघर जानवरों को अक्सर भुखमरी, शोषण और तेज़ रफ़्तार वाहनों के चलते गंभीर शारीरिक चोटों का सामना करना पड़ता है। अनगिनत जानवरों को अपना पूरा जीवन पशु आश्रयों में व्यतीत करना पड़ता है क्योंकि कोई उन्हें गोद लेने की पहल नहीं करता। इसलिए PETA इंडिया पशुओं को गोद लेने और साथी जानवरों की नसबंधी पर ज़ोर देता है जिससे पहले से जन्म ले चुके जानवरों को एक अच्छा घर और जीवन प्रदान किया जा सके।

 

अपने योगा पार्टनर को गोद लें!

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भारत में कुत्ते के मांस के सेवन को वैध्यता मिलने के बाद, PETA इंडिया ने विश्व मांस मुक्त दिवस के उपलक्ष्य में देशभर में वीगन समर्थन वाले बिलबोर्ड लगवाए https://www.petaindia.com/hi/blog/dog-meat-allowance-in-india-prompts-peta-india-to-erect-pro-vegan-billboards-across-cities-for-world-meat-free-day/ Thu, 15 Jun 2023 05:20:58 +0000 https://www.petaindia.com/blog/dog-meat-allowance-in-india-prompts-peta-india-to-erect-pro-vegan-billboards-across-cities-for-world-meat-free-day/ इस बिलबोर्ड से जनता को वीगन जीवनशैली अपनाने हेतु प्रोत्साहित करते हुए यह प्रश्न किया गया, “यदि आप कुत्ते को नहीं खाएंगे, तो चिकन क्यों खाएं?"।

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गुवाहाटी उच्च न्यायालय की कोहिमा पीठ के नागालैंड में कुत्ते के मांस की बिक्री और खपत को वैध्यता प्रदान करने वाले निर्णय पर जनता के आक्रोश के बाद, PETA इंडिया ने दिल्ली एवं मुंबई में मांसाहारियों के प्रजातिवाद (कुछ प्रजातियों के पक्ष में पूर्वाग्रह) के खिलाफ बिलबोर्ड लगवाए हैं। इस बिलबोर्ड में एक जानवर को कुत्ते के शरीर और मुर्गे के सिर के साथ दिखाया गया है, और जनता को वीगन जीवनशैली अपनाने हेतु प्रोत्साहित करते हुए यह प्रश्न किया गया, “यदि आप कुत्ते को नहीं खाएंगे, तो चिकन क्यों खाएं?”। यह बिलबोर्ड हर साल 15 जून को मनाए जाने वाले ‘विश्व मांस मुक्त दिवस’ से ठीक पहले लगवाए गए हैं और इनका उद्देश्य जनता को यह याद दिलाना है कि कुत्ते और मुर्गी दोनों को डर एवं दर्द का एहसास होता है एवं यह निर्दोष प्राणी भी अपना जीवन शांतिपूर्ण ढंग से व्यतीत करना चाहते हैं।

भोजन के लिए पशुओं का उपयोग बड़े पैमाने पर पीड़ा का कारण बनता है। कुत्तों को जबरन कैद किया जाता है, अंडे के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मुर्गियां इतने छोटे व तंग पिंजरों में कैद करके रखी जाती हैं कि वे एक पंख भी नहीं फैला पाती। मछलियों को समुद्र से निकाल कर जिंदा तड़फने के लिए मछली पकड़ने वाली नावों के डेक पर फेंक दिया जाता है और सचेत अवस्था में होने के दौरान बिना किसी तरह की बेहोशी की दवा दिये उनके अंगों को काट दिया जाता है। नर चूजे आगे चलकर अंडे नहीं दे पाएगे इसलिए अंडा उद्योग में उन्हें बेकार मानकर मौत के घाट उतार दिया जाता है और उसी तरह से डेयरी उद्योग में नर बछड़ों को बेकार मानकर उनकी माताओं से अलग करके उन्हें भूखे प्यासे मरने के लिए छोड़ दिया जाता है।

इसके अलावा, मांस और अन्य पशु-व्युत्पन्न खाद्य पदार्थ के सेवन को हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह, कैंसर और मोटापे जैसी गंभीर बीमारियों से जोड़कर देखा गया है, जबकि भोजन के लिए जानवरों को पालना और मारना SARS, बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू, इबोला, HIV और संभवतः कोविड-19 सहित कई जूनोटिक रोगों से जुड़ा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट ने निष्कर्ष निकाला है कि जलवायु आपदा के सबसे बुरे प्रभावों से निपटने के लिए वीगन जीवनशैली की ओर एक वैश्विक बदलाव आवश्यक है।

PETA इंडिया द्वारा बिलबोर्ड लगवाकर जनता को यह संदेश दिया गया है कि जिन्हें कुत्ते के मांस को खाने के विचार से घिन आती हैं उन्हें अन्य पशुओं के मांस का सेवन समान्य क्यों लगता है।

प्रजातिवाद क्या है?

वीगन जीवनशैली अपनाने की प्रतिज्ञा करें

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PETA इंडिया शिकायत पर कुत्ते को पीट-पीट कर मार डालने वाले संदिग्धों के खिलाफ नागौर पुलिस द्वारा FIR दर्ज https://www.petaindia.com/hi/blog/following-a-peta-india-complaint-nagaur-police-register-fir-against-men-for-cruelly-beating-a-dog-to-death/ Thu, 08 Jun 2023 08:39:32 +0000 https://www.petaindia.com/blog/following-a-peta-india-complaint-nagaur-police-register-fir-against-men-for-cruelly-beating-a-dog-to-death/ PETA इंडिया को इस क्रूर घटना की जानकारी एक दयालु नागरिक द्वारा दी गयी थी, जिसने मंदिर में इस कुत्ते को खून से लतपथ पाया था। इस जानलेवा हमले ...

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नागौर के बुटाटी धाम मंदिर के बाहर एक सामुदायिक कुत्ते को डंडे से पीट-पीटकर मौत के घाट उतारने के संदर्भ में जानकारी मिलने के बाद, PETA इंडिया ने नागौर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर अपराधी के खिलाफ़ FIR दर्ज़ कराने का कार्य किया। यह FIR भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 की धारा 34 और 429, और पशु क्रूरता निवारण (PCA) अधिनियम, 1960 की धारा 11 (1) के तहत दर्ज की गई है। PETA इंडिया को इस क्रूर घटना की जानकारी एक दयालु नागरिक द्वारा दी गयी थी, जिसने मंदिर में इस कुत्ते को खून से लतपथ पाया था। इस जानलेवा हमले के बाद कुत्ते ने अपनी जान गवा दी थी।

PETA इंडिया इस अपराधी की मनोदशा का मूल्यांकन और काउंसलिंग की सिफारिश करता है। जानवरों के प्रति शोषण के कृत्य एक गहरी मानसिक अशांति को इंगित करते हैं। शोध से पता चला है कि जो लोग जानवरों के खिलाफ क्रूरता करते हैं, वह आगे चलकर जानवरों या मनुष्यों को भी चोट पहुंचाने का प्रयास करते हैं। उदाहरण के लिए, केरल में अमीरुल इस्लाम को विधि की एक छात्रा जीशा का बलात्कार कर उसकी हत्या करने के लिए मौत की सजा सुनाए गयी जबकि उससे पहले वह कुत्तों और बकरियों का बलात्कार कर उन्हें मार चुका था। घरेलू हिंसा पीड़ितों पर किए गए एक अध्ययन में 71% महिलाओं ने माना कि उनके अत्याचारी पार्टनरों ने उनके कुत्तों या अन्य जानवरों को भी नुकसान पहुंचाया या मार दिया।

PETA इंडिया देश के ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम’, 1960 को मजबूत करने के लिए लंबे समय से अभियान चला रहा है। इस कानून में कड़ी सज़ाए तो हैं लेकिन यह बहुत पुराना और अप्रासंगिक है, जैसे पहली बार जानवरों पर अपराध का दोषी पाये जाने पर महज़ 50 रुपये जुर्माने का प्रावधान है।

जो लोग जानवरों के प्रति क्रूरता करते हैं वे अक्सर मनुष्यों को भी नुकसान पहुँचाते हैं इसलिए सभी की सुरक्षा हेतु ज़रूरी हैं कि जनता जानवरों के प्रति क्रूरता के मामलों की रिपोर्ट दर्ज़ कराए।

 

पशुओं के प्रति क्रूरता के खिलाफ़ मज़बूत दंड प्रावधान लाने में हमारी सहायता करें

 

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विश्व महासागर दिवस पर जलपरी ने मछलियों के प्रति अपना प्यार दिखाया https://www.petaindia.com/hi/blog/mermaid-shows-her-love-for-fish-for-world-ocean-day/ Thu, 08 Jun 2023 04:11:33 +0000 https://www.petaindia.com/blog/mermaid-shows-her-love-for-fish-for-world-ocean-day/ PETA इंडिया की एक जलपरी ने खास अंदाज़ में बेंगलुरु में राहगीरों से मछलियों और अन्य समुद्री जानवरों के लिए वीगन बनने का आअनुरोध किया।

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विश्व महासागर दिवस (8 जून) के लिए, PETA इंडिया की एक सदस्या ने बेंगलुरु में जलपरी के रूप में राहगीरों से मछलियों के प्रति उदार रवैया रखने और वीगन बनने का आग्रह किया।

वैज्ञानिक अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि समुद्री जीवविज्ञानी वर्षों से कहते रहे हैं: मछलियाँ मासूम होती है जो दर्द महसूस कर सक्कटी है, ज्ञान साझा करती हैं, और लंबी यादें और सांस्कृतिक परंपराएँ रखती हैं। कुछ मछलियाँ समुद्र तल पर रेत में जटिल कला की आकर्तियाँ बनाती हैं। फिर भी हर साल भोजन के लिए अन्य सभी जानवरों की तुलना में मछलियाँ सबसे अधिक संख्या में मारी जाती हैं। उनके गले में कांटा फसा कर उन्हें समुद्र से बाहर खींच लिया जाता है, नौकाओं पर बिना पानी वाली जगह पर फेंक दिया जाता है, पानी के बिना उनका दम घुटता है उनके कंठ फूल जाते हैं, जिंदा रहते उनके शरीर काट दिये जाते हैं।

हर साल, मछली पकड़ने का उद्योग बड़ी संख्या में “गैर-लक्षित” जानवरों को मारता है, जिसमें 100 मिलियन शार्क और रेस, 720,000 समुद्री पक्षी, 345,000 सील और समुद्री शेर, और 300,000 व्हेल और डॉल्फ़िन शामिल हैं।

वीगन बनने का संकल्प लें

वीगन भोजन ट्राई करें

 

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PETA इंडिया की शिकायत के बाद जोगुलम्बा गडवाल में सात भैंसों की बलि रोकी गई https://www.petaindia.com/hi/blog/sacrifice-of-seven-buffaloes-stopped-in-jogulamba-gadwal-following-peta-india-complaint/ Wed, 07 Jun 2023 11:20:29 +0000 https://www.petaindia.com/blog/sacrifice-of-seven-buffaloes-stopped-in-jogulamba-gadwal-following-peta-india-complaint/ PETA इंडिया की शिकायत के परिणामस्वरूप जोगुलम्बा गडवाल में एक उत्सव के दौरान सात भैंसों की बलि पर रोक लगाई गयी।

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यह जानने के बाद कि जोगुलम्बा गडवाल जिले के थाटीकुंटा गांव के कुछ स्थानीय लोग देवरा नामक एक त्योहार के दौरान सात भैंसों की बलि देने की योजना बना रहे हैं, PETA इंडिया कार्रवाई में जुट गई और गडवाल के पुलिस अधीक्षक और सर्कल इंस्पेक्टर के साथ मिलकर इस बलि पर रोक लगवाई।

PETA इंडिया ने अपने द्वारा दर्ज़ FIR में बताया कि “तेलंगाना पशु एवं पक्षी बलिदान निषेध अधिनियम, 1950” की धारा 5 (बी) के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को अपने अधिकार के आधीन स्थान पर किसी भी पशु की कुर्बानी की अनुमति नहीं हैं। धारा 4 के अंतर्गत लोगों के बीच पशुओं की बलि देने, इस प्रकार का प्रदर्शन करने या इसमें भाग लेने पर पूरी तरह से रोक है। धारा 8 अधिनियम के तहत सभी अपराधों को संज्ञेय बनाती है।

गुजरात, केरल, पुडुचेरी और राजस्थान में पहले से ही ऐसे कानून हैं जो मंदिर या उसके परिसर में किसी भी जानवर के धार्मिक बलिदान को प्रतिबंधित करते हैं। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना राज्य धार्मिक स्थल या उसके परिसर में, सार्वजनिक स्थल पर धार्मिकता से जुड़े किसी भी कार्यक्रम या जुलूस में पशुओं की बलि को प्रतिबंधित करता हैं।

पशु क्रूरता के खिलाफ़ दंड प्रावधान को मज़बूत कराने में अपना योगदान दें

हमारे कार्य का समर्थन करें

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विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में PETA इंडिया द्वारा चलाए गए वीगन अभियान में अभिनेत्री राधिका मदान अलग अंदाज़ में नज़र आई https://www.petaindia.com/hi/blog/radhika-madan-turns-into-green-goddess-for-peta-india-world-environment-day-vegan-campaign/ Mon, 05 Jun 2023 12:48:32 +0000 https://www.petaindia.com/blog/radhika-madan-turns-into-green-goddess-for-peta-india-world-environment-day-vegan-campaign/ राधिका मदान द्वारा बहुत वर्ष पहले अपनी फिल्मअँग्रेज़ी मीडियम  हेतु वज़न कम करने के लिए वीगन जीवनशैली अपनाई गयी थी और अब यह जीवनशैली उनके जीवन का महत्वपूर्ण अंग ...

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मशहूर अभिनेत्री राधिका मदान PETA इंडिया के नए वीगन अभियान में पत्तागोभी से बनी पोशाक में फ़ोटो शूट कराकर लोगों को अपने जीवन में “एक नया फैसला लेने के लिए” और “वीगन जीवनशैली अपनाने” के लिए प्रेरित किया। इस प्रिंट अभियान को विश्व पर्यावरण दिवस (5 मई) के विशेष अवसर पर रिलीज किया गया और इसे साहिल बहल द्वारा शूट किया गया है। इस शूट के लिए राधिका मदान का मेकअप और बाल कैसेंड्रा केहरेन द्वारा किए गए हैं, इन्हें स्टाइल सुकृति ग्रोवर द्वारा किया गया है और आउटफिट का संयोजन सायशा शिंदे द्वारा किया गया है।

राधिका मदान द्वारा बहुत वर्ष पहले अपनी फिल्मअँग्रेज़ी मीडियम  हेतु वज़न कम करने के लिए वीगन जीवनशैली अपनाई गयी थी और अब यह जीवनशैली उनके जीवन का महत्वपूर्ण अंग है।

अंग्रेज़ी मीडियम  में मेरे द्वारा निभाए गए किरदार ‘तारीका’ ने मुझे वीगन भोजन से परिचय कराया जिसने मेरी सोच को पूरी तरह से बदल दिया और मुझे जीवन को समझने का एक नया दृष्टिकोण भी दिया। अब मैं बहुत सी हरी सब्जियों का सेवन करती हूँ, प्रोटीन-युक्त सत्तू का सेवन करती हूँ एवं हमारे पास बहुत से अन्य पोष्टिक विकल्प भी उपलब्ध हैं। मैं सभी को पेड़-पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थ अपनाने के लिए कहूँगी क्यूंकी हेय अपने स्वयं के साथ-साथ पशुओं के लिए भी एक बेहतर विकल्प है।

वीगन जीवनशैली अपनाने वाला हर व्यक्ति अपने कार्बन फुटप्रिंट को 73% तक कम कर सकता है। वीगन जीवनशैली से भोजन के लिए कैद किए जाने वाले एवं मारे जाने वाले पशुओं के कारण फैलने वाली कई गंभीर बीमारियों को भी रोका जा सकता है जिसमें SARS, स्वाइन फ़्लू और बर्ड फ़्लू और संभवतः COVID-19 भी शामिल है।

वीगन भोजन से पशुओं को भी मदद मिलती है। जैसा कि PETA इंडिया ने अपने वीडियो एक्सपोज़ “ग्लास वॉल्स” में खुलासा किया है, अंडे के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मुर्गियां इतने छोटे व तंग पिंजरों में कैद करके रखी जाती हैं कि वे एक पंख भी नहीं फैला पाती।  गायों और भैंसों को इतनी बड़ी संख्या में वाहनों में ठूंस दिया जाता है कि कत्लखाने तक ले जाने से पहले अक्सर उनकी हड्डियाँ टूट जाती हैं, और मांस के लिए मारे जाने वाले जिंदा सूअरों के दिल में चुरा घोंप दिया जाता है। मछलियों को समुद्र से निकाल कर जिंदा तड़फने के लिए मछली पकड़ने वाली नावों के डेक पर फेंक दिया जाता है और सचेत अवस्था में होने के दौरान बिना किसी तरह की बेहोशी की दवा दिये उनके अंगों को काट दिया जाता है।

इस प्रिंट अभियान के बाद राधिका मदान कार्तिक आर्यन, अनुष्का शर्मा, शाहिद कपूर, हेमा मालिनी, R माधवन, आदि जैसे उन बॉलीवुड अभिनेताओं की सूची में शामिल हो गयी हैं जिनके द्वारा PETA इंडिया के साथ मिलकर स्वस्थ्य, दयालु और मांस-मुक्त जीवनशैली का प्रचार-प्रसार किया गया है।

बॉलीवुड की सबसे प्रतिभाशाली युवा अभिनेत्री राधिका मदान द्वारा वैश्विक स्तर पर भी भारतीय सिनेमा का प्रतिनिधित्व किया जा रहा है। मर्द को दर्द नहीं होता, कच्चे लिम्बु और सना  जैसी उनकी फिल्मों का प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल और UK एशियन फिल्म फेस्टिवल सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में हुआ।

राधिका मदान द्वारा इस वर्ष भी कई नए कीर्तिमानों को गढ़ा जा रहा एवं वह बहुत जल्द ऑस्कर नॉमिनी रही Soorarai Pottru नामक फ़िल्म के हिन्दी रीमेकसन्ना  में अक्षय कुमार के साथ नज़र आने वाली है और मिखिल मुसले द्वारा निर्देशित हैप्पी टीचर्स डे; और प्रसिद्ध विज्ञापन फिल्म निर्माता प्रशांत भागिया द्वारा निर्देशित रूमी की शराफत में नज़र आएंगी।

वीगन बनने का संकल्प लें

वीगन/शाकाहारी भोजन ट्राई करें

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PETA इंडिया की अपील के बाद पश्चिम बंगाल ने सूअरों के बाद नन्हें जीवों की रक्षा हेतु ग्लू ट्रेप पर भी रोक लगाई https://www.petaindia.com/hi/blog/after-defending-pigs-west-bengal-stands-up-for-rodents-and-other-small-animals-banning-cruel-glue-traps-in-response-to-peta-india-appeal/ Sun, 04 Jun 2023 03:41:52 +0000 https://www.petaindia.com/blog/after-defending-pigs-west-bengal-stands-up-for-rodents-and-other-small-animals-banning-cruel-glue-traps-in-response-to-peta-india-appeal/ कानून का हवाला देते हुए कहा गया है कि गोंद जाल का उपयोग करके चूहों को पकड़ना “पशु क्रूरता निवरण अधिनियम , 1960 के साथ-साथ वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम ...

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नन्हें जीवों पर नियंत्रण लगाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ग्लू ट्रेप पर प्रतिबंध लगाने के लिए PETA इंडिया की अपील के बाद, पश्चिम बंगाल के पशुपालन एवं डेयरी विभाग निदेशालय के निदेशक ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग के संयुक्त निदेशक तथा सभी जिलों के पशु क्रूरता निवारण सोसायटियों के उप निदेशक सह सदस्य सचिवों को जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड (AWBI) की सलाह का पालन करने का निर्देश दिया है। कानून का हवाला देते हुए कहा गया है कि गोंद जाल का उपयोग करके चूहों को पकड़ना “पशु क्रूरता निवरण अधिनियम , 1960 के साथ-साथ वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम (WPA), 1972 का उल्लंघन करता है।

Rat stuck in glue trap

समूह ने अपनी अपील में राज्य सरकार से भारतीय जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड द्वारा जारी किए गए सर्कुलरों को लागू करने के लिए तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया था जिससे ग्लू ट्रेप के क्रूर और अवैध उपयोग पर रोक लगाई जा सके। इससे पहले छत्तीसगढ़गोवामेघालयसिक्किमतमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्य भी इस प्रकार के सर्क्युलर ज़ारी कर चुके हैं। पिछले वर्ष, हिमाचल प्रदेश सरकार ने सुअर पालन में प्रयोग होने वाले अवैध जेस्टेशन एवं फेरोइंग क्रेट के निर्माण, बिक्री और उपयोग के खिलाफ़ सख़्त कार्यवाही की मांग की थी।

ग्लू ट्रेप जैसे क्रूर उपकरणों का उपयोग “पशु क्रूरता निवारण अधिनियम”, 1960 की धारा 11 के तहत एक दंडनीय अपराध है। इन्हें आम तौर पर प्लास्टिक ट्रे या गत्ते की चादरों को बेहद मज़बूत ग्लू से ढककर बनाया जाता हैं। इस प्रकार के ट्रेप में पक्षी, गिलहरी, सरीसृप, मेंढक और अन्य जानवरों भी अनचाहे में कैद हो सकते है जो “वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972” का उल्लंघन है जिसके अंतर्गत संरक्षित देसी जंगली प्रजातियों का “शिकार” पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। इस प्रकार के ट्रेप में फंसे चूहे या अन्य जानवर भूख-प्यास या अत्यंत पीड़ा के चलते अपनी जान गवा सकते हैं। कुछ जानवर इस ग्लू में अपनी नाक या मुंह फंस जाने के कारण दम घुटने से मर जाते हैं या अन्य आज़ादी की छटपटाहट में अपने ही अंगों को स्वयं कुतरने लगते हैं जिसके चलते खून की कमी के कारण उनकी मृत्यु हो जाती है। इतने पर भी जो जानवर जीवित पाये जाते हैं उन्हें ट्रेप सहित कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है या इन्हें कुचलने और डूबने जैसी अधिक बर्बर मौत का सामना करना पड़ता है।

रोडेंट की जनसंख्या को नियंत्रित करने का एकमात्र दीर्घकालिक तरीका किसी क्षेत्र को उनके लिए अनाकर्षक या दुर्गम बनाना है। काउंटर की सतहों, फर्शों और अलमारियाँ को साफ रखकर उनके भोजन के स्रोतों को समाप्त करना और भोजन को च्यू-प्रूफ कंटेनरों में स्टोर करना भी एक अच्छा उपाय है। इन जानवरों को बाहर निकालने के लिए कूड़ेदानों को सील करें और अमोनिया में डूबाकर रुई या कपड़े का एक गोला रखे क्योंकि इन्हें गंध से सख्त  नफरत होती हैं। जानवरों को बाहर निकलने हेतु कुछ दिन देने के बाद, प्रवेश बिंदुओं को फोम सीलेंट, स्टील वूल, हार्डवेयर क्लॉथ या मेटल फ्लैशिंग का उपयोग करके सील करें जिससे यह वापस अंदर न आ सके। किसी भी रोडेंट को घर से निकालने हेतु मानवीय पिंजरे के जाल का उपयोग किया जाना चाहिए और उन्हें 100 गज की दूरी के भीतर छोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि अपने प्राकृतिक क्षेत्र से बाहर स्थानांतरित होने वाले जानवरों को पर्याप्त भोजन-पानी खोजने में परेशानी होती है जिसके परिणामस्वरूप इनकी मृत्यु भी हो सकती है।

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PETA इंडिया के Ethik वीगन फ़ैशन प्रतियोगिता में भाग लें https://www.petaindia.com/hi/blog/peta-indias-ethik-vegan-fashion-giveaway-contest/ Thu, 01 Jun 2023 14:00:20 +0000 https://www.petaindia.com/blog/peta-indias-ethik-vegan-fashion-giveaway-contest/ इसके 3 विजेताओं का चुनाव रैनडम तरीके से किया जाएगा और उन्हें पुरस्कारस्वरूप एक बेल्ट, एक पर्स और एक विशेष उपहार दिया जाएगा।

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हाल ही में, Shark Tank India में भाग लेने वाले और भारत के 500 direct-to-consumer brands में से एक, Ethik द्वारा पुरुषों के लिए बेहतरीन वीगन चमड़े से बने उत्पादों का निर्माण किया जाता है। इस ब्रांड की स्थापना वर्ष 2013 में, भारत की सिलिकॉन वैली माने वाले वाले शहर बैंग्लोर में की गयी थी और इसका प्रमुख सिद्धान्त, “अहिंसा परमो धर्म” है। इस ब्रांड ने अपने संचालन की शुरुआत से अबतक अनगिनत पशुओं की जान बचाई है और भारत में “चमड़ा मुक्त” जीवनशैली को एक नया आयाम दिया है। इसके द्बारा दयालु उपभोक्ताओं को क्रूरता-मुक्त जूते, पर्स, बेल्ट और अन्य सामग्री के बहुत से विकल्प उपलब्ध कराए जाते हैं। Ethik द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के अवसर पर PETA इंडिया के साथ मिलकर एक प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है।

चमड़े के लिए प्रयोग होने वाली गायों और भैसों को बूचड़खाने ले जाने वाली गाड़ियों में इतने तंग ढंग से भरा जाता है कि अक्सर रास्ते में ही इनकी हड्डियाँ टूट जाती हैं या इन संवेदनशील जानवरों की दम घुटने से मृत्यु हो जाती है। बूचड़खानों में, कर्मचारियों द्वारा अन्य डरे हुए जानवरों के सामने उनमें से बचे हुए जिंदा जानवरों का गला चीरा जाता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, पशु कृषि (जिसमें कपड़ों के लिए मारे जा रहे जानवर शामिल है) मानव जाति द्वारा किए जाने वाले ग्रीनहाउस-गैस उत्सर्जन के लगभग पांचवें हिस्से के लिए जिम्मेदार है।

इस प्रतियोगिता की अवधि 5 जून से 5 जुलाई है। इसके 3 विजेताओं का चुनाव रैनडम तरीके से किया जाएगा और उन्हें पुरस्कारस्वरूप एक बेल्ट, एक पर्स और एक विशेष उपहार दिया जाएगा। आप भी पशुओं के हित में क्रूरता-मुक्त उत्पादों का चुनाव करें। इस प्रतियोगिता में भाग लें और इनाम जीतने का मौका पाएँ।

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क्या आप अमेरिका के निवासी हैं? PETA US आपको कई अन्य शानदार प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए आमंत्रित कर रहा है।

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PETA इंडिया की शिकायतों के बाद केंद्र सरकार के अधीन संचालित भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड ने सर्कसों को कारण बताओ नोटिस जारी किया https://www.petaindia.com/hi/blog/central-governments-animal-welfare-board-issues-show-cause-notices-to-circuses-following-peta-india-complaints/ Thu, 01 Jun 2023 10:58:34 +0000 https://www.petaindia.com/blog/central-governments-animal-welfare-board-issues-show-cause-notices-to-circuses-following-peta-india-complaints/ “भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड”, ने जम्बो सर्कस एवं ग्रेट इंडियन सर्कस को नोटिस भेजकर सवाल किया है कि वह इस बात का जवाब दें कि उनके “प्रदर्शनकारी पशु ...

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PETA इंडिया से मिली शिकायतों पर कार्यवाई करते हुए केंद्र सरकार के वैधानिक निकाय “भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड”, जो देश में प्रदर्शनों के लिए इस्तेमाल होने वाले जानवरों के संबंध में नियमों की देखरेख करता है, ने जम्बो सर्कस एवं ग्रेट इंडियन सर्कस को नोटिस भेजकर सवाल किया है कि वह इस बात का जवाब दें कि उनके “प्रदर्शनकारी पशु पंजीकरण प्रमाणपत्रो को तुरंत निलंबित क्यूँ नहीं किया जाए”। PETA इंडिया द्वारा दर्ज की गयी शिकायतों पर प्रथम सूचना रिपोर्ट के पंजीकरण के बात कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। पशुओं पर क्रूरता एवं इस संबंध में कई तरह के क़ानूनों के उल्लंघनों के अलावा उपरोक्त दोनों सर्कसों पर सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 289 के तहत केस दर्ज किया गया था। जम्बो सर्कस पर पक्षियों के उड़ान भरने से वंचित करने के लिए उनके पंखों को कुतरने के अपराध हेतु अतिरिक्त रूप से IPC की धारा 429 और 11(1) (L) भी लगाई गयी है। इस कारण बताओ नोटिस में यह भी शामिल किया गया है की दोनों सर्कस के बहुत से जानवर पंजीकृत है जो अकथनीय रूप से गायब हैं।

भारतीय सर्कस नियमित रूप से अवैध एवं क्रूर कार्यों को करते हैं। हाल ही में, PETA इंडिया द्वारा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (जानवरों की देखभाल एवं सुरक्षा) नियम, 2017 के तहत दायर की गयी एक याचिका के बाद, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी न्यायालय त्रिशूर ने 11 मई 2023 को एक आदेश जारी कर ग्रेट बाम्बे सर्कस से एक मकाउ एवं कटे फटे पंखो वाले एक कॉकटू को जब्त कर तिरुवन्तपुरम के चिड़ियाघर को उसकी अन्तरिम देखभाल की ज़िम्मेदारी दी थी। सरकारी पशु चिकित्सकों की एक टीम द्वारा किए गए स्वास्थ्य निरीक्षण के दौरान उन्होने यह पुष्टि की इन पक्षियों के पंख कुतरे गए हैं।

PETA इंडिया द्वारा की गयी जाँचों एवं भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड द्वारा किए गए अनेकों निरीक्षणों में यह साबित हुआ है कि जानवरों का इस्तेमाल करने वाले सर्कस स्वाभाविक रूप से क्रूर होते हैं, वह जानवरों को जंजीरों में बांधकर लगातार गंदे एवं बदबूदार तंग पिंजरों में कैद रखते हैं, उन्हें पशु चिकित्सा देखभाल और पर्याप्त भोजन, पानी और आश्रय से वंचित कर उन सब चीजों से वंचित रखते हैं जो प्रकर्तिक रूप से उनके लिए जरूरी एवं स्वाभाविक हैं। उन्हें मारपीट एवं हथियारों के डर से भ्रामक, असुविधाजनक और दर्दनाक करतब करने के लिए मजबूर किया जाता है। इन्ही यातनाओं एवं कष्ठभरे जीवन के चलते यह जानवर अत्यधिक तनाव और मानसिक रूप से पीड़ित होने के व्यवहार भी प्रदर्शित करते हैं।

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महाराष्ट्र राज्य भी नर चूजों की क्रूर हत्याओं को रोकने के लिए ओवो सेक्सिंग तकनीक को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध राज्यों की सूची में शामिल https://www.petaindia.com/hi/blog/maharashtra-joins-list-of-states-committing-to-adopting-in-ovo-sexing-technology-to-prevent-killing-of-male-chicks/ Thu, 01 Jun 2023 03:16:56 +0000 https://www.petaindia.com/blog/maharashtra-joins-list-of-states-committing-to-adopting-in-ovo-sexing-technology-to-prevent-killing-of-male-chicks/ पशुपालन आयुक्तालय ने महाराष्ट्र ज़िला पशुपालन आयुक्तों एवं ज़िला पशु क्रूरता निवारण सोसाइटी को नर चूजों की अवैध हत्याओं को रोकने के लिए तत्काल कार्यवाही करने के निर्देश जारी ...

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नर चूजे अंडे नहीं दे सकते इसलिए पोलट्री फार्म्स पर इन अवांछित नर चूजों को दर्दनाक तरीकों से मौत के घाट उतार दिये जाने की प्रथा के संबंध में PETA इंडिया की अपील के बाद पशुपालन आयुक्तालय ने महाराष्ट्र ज़िला पशुपालन आयुक्तों एवं ज़िला पशु क्रूरता निवारण सोसाइटी को नर चूजों की अवैध हत्याओं को रोकने के लिए तत्काल कार्यवाही करने के निर्देश जारी किए हैं। इसमे नर चूजों की हत्याओं को रोकने हेतु “ओवो लिंग निर्धारण तकनीक” जो जब भी भारत में उपलब्ध हो को अपनाने हेतु निर्देशित किया गया है। यह तकनीक अंडों में चूजों के विकास के प्रारम्भिक चरण यानि भ्रूण में ही लिंग की जांच करने मे सहायक होती है ताकि जीवित चूजों को दर्दनाक मौते मारने की बजाय अनचाहे चूजों को भ्रूण में ही नष्ट कर दिया जा सके। कृषि मंत्रालय, पशु पालन विभाग, डेयरी और मतस्य पालन विभाग, महाराष्ट्र से निर्देश मिलने के उपरांत यह सर्कुलर जारी किया गया है।

आयुक्तालय ने यह भी सलाह दी है कि इस दौरान अनचाहे चूजों को विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन द्वारा बताए गए तरीकों के अनुसार संभाला जाना चाहिए। वर्तमान में मांस एवं अंडा उद्योग द्वारा अनचाहे चूजों को कुचल कर, पीसकर, जलाकर, पानी में डुबोकर, मछलियों का चारा बनाने जैसे क्रूर तरीकों से मारा जाता है।

PETA इंडिया ने अपनी अपील में कहा है कि अनचाहे चूजों को मारने के सामान्य क्रूर तरीके पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(I) का उल्लंघन करते हैं। इसलिए पोल्ट्री हेचरीस तथा सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि अंडा उद्योग में लिंग निर्धारण वाली ओवो तकनीक इस्तेमाल हो। इस तकनीक को विदेशों में ईज़ाद किया गया है और यह वहाँ इस्तेमाल में है।

PETA इंडिया के निवेदन पर असम, बिहार, छत्तीसगढ़, और गोवा के पशुपालन विभागों ने यह तय किया है कि जब भी ओवो तकनीक भारत में उपलब्ध होगी वह अपने अपने राज्यों में इसको लागू करेंगे। आन्ध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, जम्मू, केरलामध्य प्रदेश,    महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तराखंड, एवं उत्तर प्रदेश ने चूजों को मौत के घाट उतारने वाले क्रूर तरीकों को समाप्त करने के निर्देश जारी किए हैं। इस वर्ष की शुरुवात में पशु क्रूरता निवारण (अंदे देने वाली मुर्गियाँ) नियम, 2023 जिसके लिए विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार अनचाहे नर चूजों की इच्छामृत्यु की स्वीकृती है, को अधिसूचित किया गया था। हालांकि, मुर्गी पालन केन्द्रों को वर्ष 2029 तक इसके न्यूनतम प्रावधान आवश्यकताओं को पूरा करना जरूरी नही है।

दुनिया भर के देश अंडा उद्योगो पर नर चूजों को क्रूर तरीकों से मारने पर प्रतिबंध लगाने की कार्यवाही कर रहे हैं। ऑस्ट्रिया, फ्रांस, जर्मनी, इटली और लक्ज़मबर्ग अलग अलग समय सीमाओं के साथ देश में नर चूजों की हत्याओं पर रोक लगा रहे हैं। और यूरोपीय संघ के नौ देश इस प्रथा पर पूरे यूरोप में प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं।

नर चूजों को मारने की क्रूर प्रथा को समाप्त कराने में हमारी सहायता करें

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